
रणत भंवर से आओ,
हे रिद्धि सिद्धि रा भरतार,
संकट हारी हो रही थारी,
जग में जय जयकार,
तर्ज – सावन का महीना।
माँ जगदम्बा अम्बा,
लाढ़ लढायो,
पालने झुलायो थाने,
गोद में खिलायो,
शिव शंकर भोले को,
है पायो प्यार दुलार,
रणत भवर से आओ,
दुंद दुंदालो बाबो,
सूंड सूंडालो,
भीड़ पढ़या यो,
बण्यो रखवालो,
ठुमक ठुमक के नाचे,
बाजे पायल की झंकार,
मोदक प्रिय मुख,
मंगल दाता,
सुर नर किन्नर,
भाग्य विधाता,
गणनायक वरदायक,
हे देवा रा सरदार,
प्रथम मनावा ध्यावा,
गणपति राजा,
विघ्न हरहु सारहु,
सब काजा,
श्याम मंडल है थारो,
थारो ही ‘राम अवतार’,
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