
रसना निशदिन भज हरिनाम ,
रामकृष्ण श्री कृष्णराम भज ,रामकृष्ण श्रीकृष्ण राम ,
दोनों सुखकर आनन्दधाम, रामकृष्ण श्रीकृष्ण राम ,
केशव कान्हा चितचोर कहो,या रघुवर अवध किशोर कहो,
रटो नितप्रतिपाल आठों याम, रामकृष्ण श्रीकृष्ण......
मन राघव के चरण गहो, या जानकी रमन की शरण चलो ,
बोलो बनकर दिल से गुलाम, रामकृष्ण श्रीकृष्ण.......
राघव सा कोई कृपालु नही, माधव सा कोई दयालु नही ,
आरत जन के आते हैं काम, रामकृष्ण श्रीकृष्ण........
धनुषधारी मुरालीधारी, जयरघुवंशी जय बनवारी ,
है प्रेमबिन्दु दोनों का धाम, रामकृष्ण श्रीकृष्णराम ,
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