
परिचय : भगतो पर जब भी संकट के बादल मंडराते है,माँ की लाल चुनरिया बच्चो की सिर पर ममता की छाया बनकर ढक लेती है | कुछ ऐसे ही भावो को माँ अपने भगतो के लिए कहना चाहती है |
पल्लो चुनरी को गेर,ढक कर राखूं चारूं मेर
काई कर लेसी ओ सारो संसार देखले
रांखू कालजे में भगतां को परिवार देखले
दिन भर मेरे कालजे में झाँक झाँक कर देखू मैं
सारी सारी रात न सोऊ,जाग जाग कर देखू मैं
थाने देखती रहू मैं , सौ सौ बार देखले
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