
राजत सरयु तट रघुबीर,
अनुज समेत दनुज बल भंजन,
सस्मित मदन शरीर,
राजत सरयु तट रघुवीर।।
रूप शील सुख अयन नयन जनु,
लगत हृदय महुँ तीर,
कुंचित कच जनु मधुप विराजत,
चारु नासिका कीर,
भाल तिलक कन कुंडल राजत,
दमकत दामिनि चीर,
अरुन अधर मधुबोल सुहावन,
बोलनि चलनि रुचीर,
आए भार हरन अवनी के,
भंजन भव भय भीर,
रचनाकार – ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र।
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