
हिचकी राधा की भर आयी,
याद जब सावरिया की आयी,
चलती सजके राधा रानी न फिर पल की देर लगाई
बाल में गजरा बांध के कजरा शर की करे आंखे काली
ओढ़ के सिर पर चटक चुनरिया छन छन गाती पायलिया
राधिका पनघट पे चली राधिका पनघट पे चली……
राधा ने पनघट पे जाकर सिर से मटकी उतारी,
मार कंकरी सावरिया ने गागरिया फोड़ डाली,
कहे श्याम कलम पट छलियाँ औ बरसाने वाली
राधा देखे नजर उठा के कहा छुपा सांवरियां,
कान्हा ने पीछे से आके झटकी सिर से चुनरियाँ,
रूप देख के हो गई लज्जित फूलो की डाली,
देख न जागत सांवरियां जी राधा जी शरमाई,
कहे अनाड़ी फिर कान्हा ने मुरली मधुर बजाई,
गुलशन कदम की डाली बोले कोयलिया काली,
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