
राधे राधे जपे जा सुबहो शाम बीरज की गलियों में
राधे राधे श्याम मिलादे...
राधे राधे जपे जा सुबहो शाम बीरज की गलियों में,
चाहे ढल जाए जीवन की शाम बीरज की गलियों में,
वृन्दावन को छोड़ कन्हैया दूर कभी ना जावे,
जो गावे श्री राधे राधे वाके संग हो जावे,
मुरली कान्हा की बाजे आठों याम,
बीरज की गलियों में,
जिसकी मर्जी के बिन जग में पत्ता ना हिल पावे,
धरती का चप्पा चप्पा जिसकी रचना कहलावे,
उसे कहते हैं राधे का गुलाम,
राधे राधे जपे जा सुबहो शाम वीरज की गलियों में |
जिसने ब्रज को देखा उसने बातें हैं ये मानी,
यमुना यम को दूर करे,भव तारे राधे रानी,
कण-कण में है चारो धाम,
सूरज ब्रज के कण कण में बस राधे राधे गूंजे,
भूल के सारी दुनिया जो राधे चरणों को पूजे,
उन्हें मिल जाता है घनश्याम,
भजन गायक - सौरभ मधुकर
प्रस्तुतकर्ता - संस्कार टी.वि.
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