
रानी राधा का दिल तोड़ गए कन्हैया
ऐ री सखी मनमोहन तो मुरली को बजा के चले गये,
मैं सोयी थी सुख निदिया में वो मुझे जगा के चले गये,
मैंने कहा प्रभु ठहरिये तो वो सर को हिला कर चले गये,
उनको तो सूझी वही हंसी वो मुझे रुला कर चले गये.....
कंधे पे काली कावल ओढ़ गये कन्हैया ,
रानी राधा का दिल तोड़ गये कन्हैया,
रोते और बिलखते हमको छोड़ गये कन्हैया,
वेदना सही ना जाए विरहा ने भुना है,
श्याम के बिना ब्रज लगे हमें सुना सुना है,
कोन सी खता पे मुखड़ा मोड़ गये कन्हैया,
आजा श्याम प्यारे ये नैना थक़ गये है,
राह देखते देखते ये पलक पक गये है,
कहानी में कैसा मोड़ दे गये कन्हैया,
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