
रिमझिम उतारू थारी आरती रामदेवजी आरती
रिमझिम उतारू थारी आरती,
दोहा – लीलो घोडो नवलखो,
मोत्या जडी लगाम,
घोडे चढिया रामदेव,
रूनीचा रो श्याम।
ओ बाबा राम रणुजे वाला,
गल बीच मोतीयन की माला,
हाथ लिए हो भाला,
ओ बाबा रिमझिम उतारू थारी आरती।।
घिरत मिठाई थारे चढे चूरमा,
धूपा री महकार पडे,
वीणा रे तन्दुरा थारे नोपत बाजे,
झालर री झनकार पडे,
ओ माता मैणादे रा लाला,
लीले घोडलीये वाला,
भगता रा हो रखवाला
गंगा ने जमुना बहे सरस्वती,
रामदेव बाबो स्नान करे,
दूरा देशारा थारे आवे यात्री,
दरगाह रे आगे निवन करे,
आंधलीया ने आँखीया देवे,
पांगलीया ने पाँव जी,
कोढिया रो कोढ मिटावे,
रूनीचा रो श्याम जी,
हरि रे चरनो मे भाटी हरजी बोल्या,
नवखंड मे निशान धुरे,
चार खूट ओर चौदह भुवन मे,
धणीया थारी कलम फिरे,
लाछा सुगणा करे आरती,
हरजी चंवर ढुलावे जी,
भाव भक्ति सु जो कोई ध्यावे,
मनवांछित फल पावे जी,
गायक – महेंद्र सिंह जी राठौर।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.




