
तरज़:-शाम तेरी सांवरी सुरत पे मर मिट
जाऊंगी
रो रो कर शाम तुम्हें,आवाज़ लगाता हूँ,
क्यों सुनते नहीं मोहन,तुमको रोज़ बुलाता
हूँ
रो रो कर....
1.अपने इस सेवक पे प्यारे,इतना ना ज़ुलम
करो,
कमज़ोर बड़ा हूँ मैं,थोड़ा तो रहम करो
अब क्या करूँ कैसे करूॅं,कुछ समझ ना
पाता हूँ,
2.करके कोशिश लाखों,आखिर मैं हार गया
दुनिया पूछे मुझसे,कहाँ तेरा यार गया
आने वाला है तू,दिल को समझाता हूँ,
3.उल्फत में क्यों छोड़ दिया,तुमने हैं साथ
मेरा,
तरस नहीं आया तुमको,यूँ देख के हाल मेरा
माधव तेरे चरणों में दुःख अपने सुनाता हूँ,
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