
लांगुरिया तू ले चल मुझे माँ के भवन पे,
माँ के दर्शनों को तरसे मेरे नेयन रे,
लांगुरिया प्यारे लांगुरिया
शोभा न्यारी पड़ी है मेरे माँ के धाम की,
लगन लागि है दिल में मेरे माँ के नाम की,
राहो में न रुकना सीद्दे ले चल भवन पे.,
भूख प्यास की न मुझको है कोई फ़िक्र,
मेरी जुबा से निकले बस माँ का ही जीकर,
जय माता की बोल के तू ले चल भवन पे,
गूंज रहे है जैकारे चहु और मैया के,
दे रहे है सन्देश आके मिल जा मियां से,
जल्दी जल्दी चल तू मुझे ले चल भवन पे
जगह चरणों में माँ के तू लांगुरियां दिला दे,
सही जाये न ये दुरी मुझे माँ से मिला दे,
मुझपे कर्म कर तू मुझे ले चल भवन पे,
भवन माँ मुझे नजर आने लगा,
साथ मुझको अजीत का है भाहने लगा ,
मिल के माँ का करेंगे हम दर्शन भवन पे,
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