
लाज रखो मेरे श्याम,
बड़ी दूर से आया हूँ सांवरे,
कहने दिल की बात,
मैं तो हूँ दीन अनाथ,
कहाते हो तुम दीनानाथ,
तर्ज – नफरत की दुनिया को।
गम के थपेड़ो से,
हर दम ही हारा हूँ,
अपनों में रह कर भी,
मैं बेसहारा हूँ,
तुमसे ना कुछ भी छिपे है,
श्याम मेरे हालात,
दुनियाँ की आँखों में,
चुभने लगा हूँ मैं,
अपने ही साये से,
डरने लगा हूँ मैं,
आँखों से भी होने लगी,
अब अश्को की बरसात,
आंसू ही है केवल,
तुम्हे भेंट चढ़ाने को,
अब थाम लो आकर,
कान्हा दीवाने को,
झोली में ‘मोहित’ की,
डाल दो प्रेम की सौगात,
गायक – हरी शर्मा जी।
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