
वण व्यापारी मारा सतगुरु आया,
कोई कोई चीजो लाया रे हे हा,
लोंग सुपारी वीरा डोडा एलसी,
भारी वस्तु लाया रे।
मनवा वनज करे नी मारा भाई रे,
वनज को जारे लाभ चोगणा,
हाट बाजारों माय रे हा हा।
साचा जघेरी हीरा परखन लागा,
नुगरा ने ठोकर मारे रे।
तीन गुणा री भाई घड़ी वनाई रे,
अवगुण डोडा माय रे ह हा,
ओम सोभ दोई तोलण बेठा,
गणता ही भले नाइ रे,
रात दिन री चौसट घड़ी रे,
पल भर बिछड़ नाही रे है हा,
गुरु शरणे माली लकमोजी बोले,
खेलत जोनत वे नर भाई रे।
गायक – ओमप्रकाश प्रजापत।
भजन प्रेषक – डूंगाराम प्रजापत
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