
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ।।
गणपति बप्पा मोरयां, तेरा करम मेरा भरम,
मेरा धर्म तू ही तू, जनम वनम कुछ भी नहीं ।
परम तू ही तू, सितम वितम दया क्षमा,
अज़ब तेरी अदा है, जगत तू ही भगत तू ही ।।
हो, तू ही दाता तू ही विधाता, तेरा ये जग तू जग सारा,
तू ही आँधी, तू ही तूफ़ान, तू ही मौजें तू ही किनारा ।
तू सुख कर्ता तू ही दुख हरता, तू ना होता मैं जाने क्या करता,
विघ्नहर्ता, तू मेरा विघ्नहर्ता रे, विघ्नहर्ता, तू मेरा विघ्नहर्ता रे ।।
जब जब दुनियां ने, हाथ नहीं थामा,
मेरा सफर देवा, तेरे द्वार आया ।
धूप नहीं है मेरी, छाँव नहीं मेरी,
सब कुछ है तेरा बप्पा मोरया ।।
राहें भी तेरी पनाहें भी तेरी,
इन आहों को मेरी बस तेरा सहारा ।
हे सुख कर्ता तू ही दुख हरता,
तू ना होता मैं जाने क्या करता ।।
विघ्नहर्ता तू मेरा विघ्नहर्ता रे,
गणपति गणपति,
गणपति बप्पा मोरया,
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