
वृन्दावन के ओ बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी,
हमसे परदा करो ना मुरारी….-2
हम तुम्हारे पराये नहीं हैं,
गैर के दर पे आये नहीं है...-2
हम तुम्हारे पुराने पुजारी,
हरिदास के राज दुलारे,
नन्द यशोदा की आँखों के तारे...-2
राधा जू के साँवरे गिरधारी,
बंद कमरों में रुक ना सकोगे,
लाख पर्दो में छुप ना सकोगे....-2
तुमको हर और हम है व्यापारी,
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