
वृन्दावन के कृष्ण कन्हैया कब लोगे खबरिया
वृन्दावन के कृष्ण कन्हैया,
कब लोगे खबरिया,
द्वार तिहारे खड़ा मैं कबसे,
कब होगी नजरिया,
तर्ज – नगरी नगरी द्वारे द्वारे।
जबसे लगन लगी है तेरी,
शरण तुम्हारे आए जी,
बाट निहारत थक गए नैना,
गीत ख़ुशी के गाएँ जी,
तेरे दरश की अभिलाषा में,
बीती रे उमरिया,
ग्वाले गोपी मिलकर खेलें,
रास रचाये साथ में,
राधा जी संग झूला झूलें,
बंसी तेरे हाथ में,
मैं विरहा की मारी रोऊँ,
कब आये सांवरिया,
मीरा के प्रभु गिरधर नागर,
सुर को श्यामल भाया जी,
अर्जुन के तुम मोहन प्यारे,
अद्भुत तेरी माया जी,
‘सागर’ तेरे शरण में आया,
हो के रे बावरिया,
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