
तीन आँख है आपके
और शीश पे चंदा रहता है
बालों से गंगा निकलती है
मुझे ऐसा गणपती कहता है
कैलाश पे यही देखने
आया इस बार हु
शंकर जी मैं आपके
बेटे का यार हूँ
ऊँचे पर्वत पे रहते हैं
कैलाश के वासी हैं
नंदी पर बैठ के जाते है
जब जाते काशी हैं
साँप गले में रहते हैं
पर उनको डसते नहीं
गन्नू कहता मेरे पप्पा
भूतों से डरते नहीं
गणपति जितना आपसे
मैं भी करता प्यार हूँ...
एक हाथ त्रिशूल एक से
डमरू बजता है
शीश पे आपके चंदा
और भी सुंदर लगता है
अरे नीले नीले कंठ आपके
सबसे न्यारे हैं
सच्ची में हाय शंकर जी
आप कितने प्यारे है
दोस्त बनोगे क्या मेरे
मै तो तैयार हु
ऐसे ही सुन्दर भजन आप निचे दी गयी सूचि में देख सखते है
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