
शुकराना तेरा दातिये शुकराना तेरा दातिये,
मैं कर्ज दार तेरा हु माँ,
अपने चरणों में राखिये,
जब से मैंने मैया चूमि तेरी चौकठ की पावन मिटी,
किस्मत के पन्ने बदल डाले मेरी किस्मत तूने आप लिखी,
मैं अपने मुख से कैसे कहु सब जानता है ज़माना,
मेरे जीवन के हर इक दुःख को अपने हाथो से निकाला है,
मेरी झोली में अपनी किरपा का सागर भी भर डाला है,
तेरी देख के किरपा किरपा मई मैं हो गया तेरा दीवाना,
मैं तीनका था इक धरती का तेरी किरपा से अम्बर पर हु,
मैं जो भी हु इस दुनिया में केवल तेरी रेहमत पर हु,
शर्मा का वायुद नहीं कुछ भी बिन तेरे नहीं अफसाना,
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