
श्याम तुम्हारे हम भक्तों पर इतने है उपकार
श्याम तुम्हारे हम भक्तों पर,
इतने है उपकार,
कर्ज तेरा कैसे चुकेगा,
देखे – तेरा कैसे कर्ज चुकाऊं।
उंगली पकड़ कर चलना सिखाया,
रोते थे जब हम हसना सिखाया,
अटकी थी तब नाव भंवर में,
तुमने लगाई पार,
हर सांस मेरी कर्जदार तेरी,
मेरी जिंदगी भी तलबगार तेरी,
रह रह करके मेरे मन में,
आए ये ही विचार,
बहे आंसू चरणों में इतना ही मांगे,
सिर भी हमारा झुके तेरे आगे,
अंत समय तक मिलता रहे,
हमें श्याम तुम्हारा प्यार,
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