
श्याम प्यारे तेरे गीत गाता रहूं तू बुलाता रहे और मैं आता रहूं
श्याम प्यारे तेरे गीत गाता रहूं,
तू बुलाता रहे और मैं आता रहूं,
मैं आता रहूं,
बाबा ओ श्याम बाबा,
तर्ज – गंगा मैया में जबतक।
मैंने बचपन से तुमको ही ध्याया,
अपने ख्वाबों में तुमको बसाया,
याद आती रहे यूँ रुलाती रहे,
तुझे असुवन की भेंट चढ़ाता रहूं,
चढ़ाता रहूं,
जबसे तेरी शरण में मैं आया,
जो ना सोचा था वो मैंने पाया,
तेरा एहसान है तू मेहरबान है,
तेरे चरणों में सर को झुकाता रहूं,
झुकाता रहूं,
तेरे भजनों में अद्भुत है शक्ति,
तुझसे मिलने की इनमे है युक्ति,
इनमे भावों का श्रोत जो करे ओत प्रोत,
ऐसे भजनों को तुझको रिझाता रहूं,
रिझाता रहूं,
श्याम ‘बिन्नू’ की है ये तमन्ना,
सदा फूटे ये भावों का झरना,
ऐ मेरे प्रियतम ना रुके ये कलम,
मैं तो लिख लिख के तुझको सुनाता रहूं,
सुनाता रहूं,
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