
सजा दो दर को फूलो से माँ का नवरात्र आया है,
माँ का नवरात आया है
समप्रदा कीर्ति यश भेभव सुख समृधि लाया है,
पखारो माँ के चरणों को बहादों प्रेम की गंगा
विशादों फूल पलकों से माँ का नवरात आया है,
देख कर अपनी मैया को मेरी आँखे भी भर आई
हुई रोशन मेरी गलियां माँ का नवरात आया है,
बना कर भोग हाथो से हे माँ मैं तुझे खिलाउगा
रहेगा सेवा में देविंदर
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