
सतसंगत अमर झड़ी है,
ज्याने लाभ मिळियो सतसंग में,
उनको खबर पड़ी है ।।
प्रहलादे संगत सिरिया देरी कीनी,
रामजी री खबर पड़ी है ।
हिरणाकुश ने थम्भ तपायो,
थम्भ से बाथ भरी है ।।
नरसी रे संगत पीपा जीरी कीनी,
सुई पर बात अड़ी है ।
छप्पन करोड रो भरियो मायरो,
आया ए आपहरी है ।।
रामजी संगत सुग्रीव री कीनी,
वानरों री फौज बणी है ।
वानरों री काँहि सिमरथा,
जाय रावण से लड़ी है ।।
लोहे संगत काठरी कीनी,
भाई जलपर जहाज तिरी है ।
रामानन्द रा भणे कबीरा,
बिल्कुल बात खरी है ।।
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