
सन्मुख परचा देवे घनेरा मन रा काज सरिजे मेलो रणुजे भरीजे
सन्मुख परचा देवे घनेरा,
सनमुख परचा देवे घनेरा,
मन रा काज सरिजे,
भादरवे मेलो रणुजे भरीजे ए हा।।
अरे सोवनी द्वारका सु,
कृष्ण पधारीया ने,
सोवनी द्वारका सु,
कृष्ण पधारीया,
अरे तंवरो ने तिलक जडीजे,
अरे ऊंट गाडी ने घोडा घनेरा,
बाबा ऊंट गाडी ने घोडा घनेरा,
मोटरो मे मिनक भरीजे,
अरे गाँव गाँव सु आवे देवरे,
गाँव गाँव सु आवे जातरू,
बापजी ने निवन करीजे,
अरे धोली ध्वजा रो देवल आपरो,
धोली ध्वजा रो देवल आपरो,
दिवले री ज्योत भरीजे,
अरे हरी चरने भाटी हरजी बोलीया,
हरी चरने भाटी हरजी बोलीया,
मापर मेहर करीजे,
प्रेषक – मनीष सीरवी
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