
समय का एक पहिया चलता है,
दोहा – सदा रंक नही राव,
सदा मरदंग ना बाजे,
सदा धूप नही छाव,
सदा इंदर ना गाजे।
सदा न जोवन थर रहे,
सदा न काला केस,
विक्रम कहे बेताल सुनो,
सदा न राजा देश।
शीत हरि नित एक निशाचर,
लंक लहि वही दिन आयो।
एक दिन पाण्डव गए बन में,
एक दी से फिर राज कमायो।
एक दिन नल तजि दमयन्ती,
एक दिन से फिर छत्र धरायो,
सोच परवीन कब करिये,
किरतार विसंभर खेल रचायो।
समय समय में होत है,
समय समय की बात,
एक समय मे दिन बड़ा,
एक समय की रात।।
उस पहिये के साथ किसी का,
भाग्य बदलता है,
समय का इक पहिया चलता है।।
लख घोड़ा लख पालकी,
सिर पर छतर धरे,
सत्यवादी राजा हरिचन्द्र देखो,
नीच घर नीर भरे,
उस राजा के लाल को देखो,
बिन कफन के जलता है,
भरी सभा मे द्रुपद सुता को,
लाया अभिमानी,
भीष्म कर्ण द्रोण जा देखो,
एक नही मानी,
पाचो पांडव द्रुपद को देखो,
बैठे बैठे जलता है,
समय का पहिया एक दिन देखो,
दशरथ के आया,
सरयु नदी के तीर खड़ा,
वो बाण चलवाया,
बाण जा सरवन के लगो,
प्राण निकलता है,
हाथ जोड़ करि बिनती,
मन्दोदरी रानी,
बार बार संजय पर वो,
कर साधु का भेष रावण,
सिया को छलता है,
बलख बखरा बादशाह,
सुल्तान बड़ा नामी,
सुन बांधी की बात मन मे,
हो गई हैरानी,
रथ पालकी तियाग सभी को,
वन को जाता है,
तुलसी नर का क्या बड़ा,
समय बड़ा बलवान,
काबे लूटी गोपिया,
वे अर्जुन वे ही बान,
समय से चलता शशि को देखो,
भान निकलता है,
– गायक एवं प्रेषक –
श्यामनिवास जी।
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.


