
सर पे घुमा दो मोरछड़ी
मोरछड़ी बाबा मोरछड़ी
सर पे घुमा दो मोरछड़ी
कलयुग के अवतारी बाबा
मेरी नैया अटकी पड़ी
विनती मेरी सुनलो ये
ग्यारस की बारस पर बाबा
तेरे दर पर आऊं जी
ऐसी कृपा करो सांवरे
हारा हुआ जीत जाऊं जी
तेरे दर पर आकर बाबा
सब कुछ भूल मैं जाऊं जी
सब भक्तों की विनती सुनके
मेरी भी बाबा सुनलो जी
सब जगह से हार गया हूँ
और मुझे ना हराओ जी
लखदातारी तेरी बाबा
लाखों रोज़ लुटावे जी
विपदा मुझ पर आ पड़ी है
रास्ता मुझको दिखाओ जी
खाटू वाले श्याम धणी थाने
श्याम बहादुर बुलावै जी
बैलगाड़ी से चल कर बाबा
पहुँच गए रेवाड़ी भी
अपने भक्ति के पीड़ा सुनकर
मोरछड़ी लहराई जी
मोरछड़ी की महिमा निराली
श्याम बहादुर गावे जी
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