
शेरावाली माँ
पहाड़ावाली माँ
हो सांचा सांचा है दरबार
आये भक्त तुम्हारे द्वार
आस यूंही माँ जगाए रखना
हो तूने किया हमें स्वीकार
बरसाया है प्रेम अपार
नाता यूंही माँ निभाए रखना
कृपा बनाये रखना मैय्या
कृपा बनाये रखना
हो मैया जी
नाम तेरा लेकर सुबह
होती शुरू ओ मैय्या
रात दिन ही तुझको
मैं सिमरूँ माँ
जय माँ
जय जय माँ
आरती उतारूं तेरी
जाप तेरा ही करूं माँ
शीश तेरे चरणों पे धरूं माँ
जीवन को मेरे हरपल
तेरा ही सहारा है
मंझधार में नाव है अटकी
बस तुही किनारा है
हो तेरे कितने हैं उपकार
तेरा शुक्र है बारम्बार
दूर हमसे तू बलाएं रखना
साँचा है दरबार
तेरे दर पे आये हैं
बाँह तूने पकड़ी जब से
मिट गई है चिंता तब से
बस हमें तो तुझ पे ही विश्वास है
हो.. चाहे रूठे जग ये सारा
छोड़े कोई साथ हमारा
ये पता है अब तू मेरे पास है
तूने ही तो माँ मेरे
कष्टों को मिटाया है
हमको गिरने से पहले
हर बार उठाया है
करके हम सबका उद्धार
तूने बदल दिया संसार
सच की राह तू दिखाये रखना
संग तेरा पाके मैया
लग रहा है ऐसा जैसे
हर किसी में तेरा ही स्वरूप है
राग द्वेष सारे मन से
छूटने लगे हैं जैसे
बदला बदला मेरा रंग रूप है
तूने जीवन में आके
जीवन ये सुधारा है
हम तो कुछ ना कर पाते
जादू ये तुम्हारा है
हो मन से मिटे हैं बुरे विचार
सबके लिए जगा है प्यार
हमको ऐसे ही बनाए रखना
दुर्गा आरती
दुर्गा चालीसा
देवी दुर्गा कवच
शेर पे सवार होके
माँ शेरावालिये
आ माँ आ
अटल छत्र सच्चा दरबार
चलो बुलावा आया है
मेरे नैनों की प्यास बुझा दे
बिगड़ी मेरी बना दे
सावन की रुत है
लाल लाल चुनरी
धरती गगन में होती है
कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे
भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे
बारिशों की छम छम में
नन्हे नन्हे पाँव मेरे
या देवी सर्वभूतेषु
मैं हूँ दासी तेरी दातीये
ऊँचे ऊँचे पर्वत पे
माँ पहाड़ान वालिये
मैया जी के रहते दुःख में क्या रोना
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