
साँवरिया आ रे ओ नानी आंसुड़ा ढलकाये संजू शर्मा
साँवरिया आ रे,
ओ नानी आंसुड़ा ढलकाये,
बिलखे हिवड़ो जिव जलाये,
वा तो थारे रही बुलाय,
तर्ज – ओ बाबुल प्यारे
बाबुल म्हारो निर्धन घणो है,
लागि लगन वाके थारी,
साधा सागे सासरिये में आयो,
कुछ भी ना सोची विचारी,
ना तो रीत रिवाज निभावे,
ना ही सासरिये ने लुभावे,
बस गिरधारी गिरधारी गावे,
वा तो थे रही बुलाय।।
ल्यावे कठी से हाथी और घोडा,
ल्यावे कठी से सोना चाँदी,
माँ का जाया बीर बीणा कुण,
म्हणे चिर उडासी,
म्हारी सासु ताना मारे,
बेरण नणद पड़ गई लारे,
देवर नारण्यो रूसो ही जाए,
सब करमा को दोष सांवरिया,
किंण पर दोष लगाऊं,
आज सांवरिया ना आयो तो,
ज़हर खाय मर जाउँ,
भोलो बाबुल मेरो लजाय,
में तो मरुँ कटारी खाय,
क्या में देर में देर लगाय,
करुण पुकार सुनी नानी की,
आया कृष्ण कन्हाई,
राधा रुक्मण हिवड़े लगाए,
मुड़ के नानी बाई,
अम्बर से धन वर्षा आई,
कान्हो चुनडिया ओढाई,
नानी नरसी को मन हर्षाय,
ऐसो भरयो है आज मायरो,
कदे भरयो ना जायसी,
निर्मल मन से जो भी बुलायसी,
सांवरियो आ जासी,
म्हारो सांवल सा गिरधारी,
जाकी लीला घणी है न्यारी,
वाकी महिमा ना वरणी जाए हो,
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