
सांझ सवेरे नैन बिछा के,
राह तकु रघुनन्दन की,
राम आएँगे जग जाएगी,
किस्मत मेरे आँगन की,
मुझ दिनन के कर्मो पर कब,
राघव करम कमाएँगे,
लगता है रुकने वाली है,
लगी झड़ी जो असुवन की,
अजमाएँगे राम जी कबतक,
सबर भला मुझ शबरी का,
हो जाउंगी धन्य लगाकर,
माथे धूलि चरणन की,
निर्धन की कुटिया का कण कण,
पावन मंदिर सा होगा,
चरण पड़ेंगे रघुवर के जब,
हो जाएगी कंचन की,
रघुवर खातिर चुन चुनकर मैं,
बेर लाऊंगी वन वन से,
कब आए कब भोग लगाए,
हो पूरी इच्छा मन की,
कब निरखेंगे श्यामल छवि को,
तरस रहे ‘लख्खा’ के नयन,
कट जाए चौरासी मेरी,
जनम जनम के बंधन की,
स्वर – श्री लखबीर सिंह लख्खा जी।
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