
सांवरिया अपने भक्तो को तुम भी क्या यूँ रुलाओगे
सांवरिया अपने भक्तो को,
तुम भी क्या यूँ रुलाओगे,
चलते चलते हार गया मैं,
क्या तुम मुझे जिताओगे,
तर्ज – कस्मे वादे प्यार वफ़ा।
दर दर जाकर हार गया था,
मिलता कुछ ना सहारा था,
हारे का तू साथ निभाता,
कहता सारा ज़माना था,
ये ही पूछने आया तुमसे,
तुम क्या साथ निभाओगे,
ग़म के अँधेरे दुःख के बादल,
चारों और मंडराते हैं,
कितनी भी मैं कर लूँ कोशिश,
वो तो छट नहीं पाते है,
तू ही बता दे अब तो मोहन,
क्या मुझको अपनाओगे,
पीड़ा इतनी क्या तुझको बताऊ,
जिन्दा हूँ ये गनीमत है,
देख के हालत तू ही समझ ले,
कहने की क्या ज़रूरत है,
देना नहीं तो साथ ओ बाबा,
ज़िंदा भी क्या लौटाओगे,
आ ही गया अब दर पे तेरे,
तुम ही साथ निभाओगे,
औरों की भी नैया चले है,
मेरी भी तुम ही चलाओगे,
‘भानु’ बोले साथ निभा दो,
क्या ज़्यादा तरसाओगे,
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