
साई मैं तेरे दर आया जो हार कर
साई मैं तेरे दर,
आया जो हार कर,
तूने पकड़ी कलाई,
मजा आ गया,
अब ना चिंता फिकर,
दिल में रहता ना डर,
ज़िंदगी मुस्कुराई,
तर्ज – श्याम जाने जिगर।
हर कदम ठोकरे,
खाता चलता था मैं,
गिरता था और खुद ही,
संभलता था मैं,
अब जो ठोकर लगे,
बढ़ के तू थाम ले,
गिर ना पाऊं मैं साई,
मुझपे किरपा की तेरी,
नजर जो पड़ी,
तेरी मस्ती में साई,
रहूं हर घडी,
रखा सिर पे जो हाथ,
तूने ओ साई नाथ,
प्रीत तेरी है पाई,
तेरे दरबार की मैं,
करूँ चाकरी,
रोज तेरी बजाता,
रहूं हाजरी,
यूँ ही मेरी उमर,
जाए ‘कुंदन’ गुजर,
तुझसे अर्जी लगाई,
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