
साधु भई एडा संत मैं नही जोया,
पल पल पीरजी रो नाम रटावे,
वीरद भगती वाला बोया,
ओ साधु भई एडा संत मै नही जोया।।
ए पल पल पीरजी रो नाम रटावे,
संत सायब रो एक ही रूप है,
भगती भाव मे बोया,
ए विश्वासना मनडे मारी गुरू,
तन रा अवगुण खोया,
विश्वासना मनडे मारी गुरु,
बडी सो माता छोटी सो बहना,
मन माई गांठ गुराया रे,
भेद भावना रत्ती नहीं राखी,
गुरू एकन धागे सब पोया,
अपना पराया नहीं अंतर में,
ओ अपना पराया नहीं अंतर मे,
ओ आदर भाव हिल होया ओ,
निर्मल नाथजी निर्मल योगी,
योगी साधना मे खोया,
कलयुग मे दाता साची भगती,
इन कलयुग मे दाता साची भगती,
भगती भाव सुख पाया,
निर्मल नाथजी साची भगती,
भगती ज्ञान सुनाया,
भगती ज्ञान बताया,
ए सत्य धर्म री बात बतावे,
माता री सेवा रो केवे गुरू,
यश “जोरावर” गावे ओ,
गायक – श्याम पालीवाल जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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