
सावरिया सरकार मेरे
सावरिया सरकार मेरे सावरिया सरकार,
ब्रम्हा भोले करते मेरे कान्हा का दरबार,
मेरे सावरिया सरकार मेरो सावरिया सरकार।
मोर मुकुट पीताम्बर देख के चंदा भी शरमाये,
सुरनर मुनि जन कीरति गावे मन ही मन हर्षाये,
तीनो लोक के कण कण का है तू ही श्रीजन हार,
दुर्योधन की मेवा त्यागे साग विदुर घर खाई ,
बीच सभा मे बहन द्रोपदी की प्रभु लाज बचाई,
बीच भवँर में नैया मेरी कर दो बेड़ा पार,
आज धरा पर गंगा यमुना रोती आस लगाए,
धर्म बना व्यापार कन्हैया किसको दर्द सुनाये,
हाथ जोड़ विनती प्रभु मोरी आ जाओ एक बार
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