
सिमरुला शारद माय सिमरुला सरस्वती
सिमरुला शारद माय,
सिमरुला सरस्वती,
लागु गजानन्द पाय,
गुरुजी ने निमण करु,
अरे रंग मेल मे हाल,
फुलड़ो री सेज वसी,
थोड़ो ग्यान कोकड़े हाल,
सुखमणा री सेज वसी,
गुरु बिना मलिया नी ग्यान,
भजन बिना मुक्ति नही रे हा।।
नही देवलिया में देव,
झालर कुटो मती,
धुप ज्योरो अग्न जले,
वासना तो पवन बखी,
सुरता रंग मेल मे हाल,
नही नेणो में तेज,
आलसी री गरज केसी,
दिन रेण एकण भाव,
भोण भले उगो मती,
अरे नही भजो में जोर,
सूरो संग चढो मती,
भीड़ पड़े भाग जाय,
बगतर री गरज केसी,
डगमग डुले जीव,
हरी भक्ति झेलो मती,
तत बिना मलियो नी राज,
बोल्या गोरख जती,
गायक – जोग भारती जी।
प्रेषक – पुखराज पटेल बांटा
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