
सिसक सिसक ने रोवे टाबरिया भगता रो परिवार
सिसक सिसक ने रोवे टाबरिया,
भगता रो परिवार,
भवानी म्हारी जगदम्बा,
माँ भगता रो परिवार,
ए सेवका री अरजी माता,
साम्भलो रे माँ ओ माँ।।
मै तो थारा कहिजा पुजारी,
सुनो ब्राम्हणी मात,
ए थारा रे टाबरिया री अरजी,
साम्भलो ए माँ ओ माँ।।
रमता खेलता आवो भवानी,
भगता रे दरबार,
कुलदेवी ब्राम्हणी माँ,
कुलदेवी जगदम्बा,
ए थारा सेवक ने दर्शन,
देवजो ए माँ ओ माँ।।
चितौड़गढ़ मे आप बिराजो,
कुलदेवी जी आप,
ए माता ब्राम्हणी अरजी,
दीन दुखी रा कारज सारो,
थेतो ब्राम्हणी मात,
ए सोनाला रा भेरू अरजी,
राती जोगा मे आवजो माँ,
कर सोलह सिन्गार,
माँ कर सोलह सिन्गार,
राती जोगो सेवक थारो,
राखीयो ए माँ ओ माँ।।
माली भूरजी सेवक आपरो,
दर्शन देवो आप,
कलयुग माई कहिजे थारो,
आसरो ए माँ ओ माँ।।
गायक – श्याम पालीवाल जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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