
ऊँची ऊँची पौड़ी चढ़के आया तेरे द्वार माँ ,
ऊँची ऊँची पौड़ी चढ़कर आया तेरे द्वार माँ,
सुन ले पुकार माँ कर दे उपकार माँ,
तेरे सिवा नहीं साथी मेरा कोई इस संसार में ,
तुझपे भरोसा करके मैया आया पहली बार में,
मेरे सारे पाप भुलाके मेरे सारे पाप भुलाके दे दे अपना प्यार माँ ,
जय माँ,
जय माता दी……..
हार गया मैया मैं तो दूख की रोज लड़ाई से,
अब तो मुझको डर लगता अपनी ही परछाई से ,
अब तो मेरे जीने का है अब तो मेरे जीने का है एक तू ही आधार माँ,
जय हो,
तू दुःख हरणी संकट हरणी तू ही पालन हारी है,
कहे अनाड़ी तू सुख करनी तू ही मंगलकारी है,
अपने बेटे रितेश की नैया अपने बेटे रितेश की नैया कर दे अब तो पार माँ,
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