
सुन सांवरे तुमको कब से पुकारें रे
सुन सांवरे तुमको,
कब से पुकारें रे,
नैना भी म्हारे प्यारे,
रो रो के हारे रे,
तर्ज – ओ सांवरे हमको।
अपनी ही उलझनों में,
उलझे हम आए रे,
मिलते ही नैन तुमसे,
कुछ ना कह पाए रे,
अंखियों से बरसे मोती,
दर पे तुम्हारे रे,
दुखियों की भीड़ दर पे,
रहे दिन रात है,
जाने है तू तो हर एक,
दिल की रे बात है,
भींगी हैं पलकें सबकी,
तुमको निहारे रे,
बांकी है चितवन तेरी,
बांके ही नैन हैं,
मिल के भी तुमसे बाबा,
रहते बैचेन हैं,
करते हैं घायल तेरे,
नैन कजरारे रे,
कृपा हो जाए तेरी,
विनती हमारी है,
भक्तों में तेरे नहीं,
गिनती हमारी है,
कहता ना झूठ “जालान”,
चाहे तू बिसारे रे,
– लेखक –
पवन जालान जी।
9416059499 भिवानी (हरियाणा)
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