
सुनो सुनो वचन नर नारी।
हरि भजन करो सुखकारी।।
जिन रचा शरीर तुम्हारा,
उसका क्युँ नाम बिसारा।।
कृतध्न शठमूढ अनारी,
खाना पीना सो जाना,
सब काम है पशु समाना।।
क्युँ देह मनुज की धारी,
वो तो अंदर से समझा रहा है हमे
दुनिया मे आ शुभ कर्म कमा तू है दो दिन का
प्रभु मेरे दिल में प्रेम भर दो हर पल तेरी सेवा
आप दृष्टि यूं ही देते रहो बाबा सुख सागर मे गहरे
सांचा साहिब एक तू मैं आशिक़ तेरा
हे प्रभु कुछ दम उधारा चाहिए तेरे चरणों का सहारा चाहिए
हर एक डगर हर मंज़िल पर एक तेरा सहारा काफ़ी है
शरण में आये हैं हम तुम्हारी दया करो हे दयालु भगवान
मुझे रास आ गया है तेरे दर पे सर झुकना
भक्ति के रंग से ओ ईश्वर के घर का निकले रास्ता
प्रभु तेरा द्वार ना छूटे रे छूट जाए संसार
मुसाफिर यूँ क्यो भटके रे ले हरी को नाम काम तेरो
आराम के क्या क्या साथी थे जब वक्त पडा तब कोई
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