
सुरज को उगने ना दूँगा लक्ष्मण को मरने ना दूँगा
सुरज को उगने ना दूँगा,
लक्ष्मण को मरने ना दूँगा,
ये वादा तेरे हनुमान का,
सुरज के पास जाके,
पहले समझाऊंगा,
मान जाए ठीक नहीं तो,
मुख में दबाऊंगा,
छा जाए घोर अँधेरा,
फिर होगा नहीं सवेरा,
ये वादा तेरे हनुमान,
काल का भी काल हूँ मै,
नाम से डरेगा,
बाँध लूँगा मौत फिर,
कोई ना मरेगा,
मेरे रामजी उदास ना होना,
मेरे रहते कभी ना रोना,
ब्रम्हा जी के पास जाके,
बही खुलवाउंगा,
आयु होगी छोटी तो फिर,
लम्बी करवाऊंगा,
ब्रम्हा की कलम चलेगी,
लक्ष्मण की उमर बढ़ेगी,
बूटी की तो बात क्या,
पहाड़ ले के आऊंगा,
राम जी के खातिर,
मै तो कुछ भी कर जाऊँगा,
अरे भक्त प्रभु मै तेरा,
कुछ रखिये भरोसा मेरा,
दीजिये आशीर्वाद मै तो,
बूटी लेने जाता हूँ,
चुटकी बजाके मै तो,
बूटी लेके आता हूँ,
जो लखन के प्राण न लाऊँ
ना अंजनी पुत्र कहाऊँ,
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