
सौंपी तुझे ही पतवार मुरारी,
दोहा – दरबार तेरा दरबारों में,
एक ख़ास अहमियत रखता है,
उसको वैसा मिल जाता है,
जो जैसी नियत रखता है।
करना मुझे भी भव पार मुरारी,
कर अर्जी को लीजो स्वीकार मुरारी,
तर्ज – प्यारा सजा है तेरा द्वार।
गणिका गिद्ध अजामिल तारे,
कीजो मेरा भी अब उद्धार मुरारी,
बिच भंवर अटकी पड़ी नैया,
मांगे सहारा लाचार मुरारी,
स्वामी शरण में अपनी रखियों,
दीजो कभी ना बिसार मुरारी,
‘रामकुमार’ है तेरा पुजारी,
‘रघुवंशी’ का करदो बेड़ा पार मुरारी,
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