
हनुमानजी कभी मेरे घर भी पधारो
Hanumaanaji Kabhi Mere Ghar Bhi Padhaaro lyrics
By showering wisdom and discretion
हनुमानजी कभी मेरे घर भी पधारो,
बुद्धि विवेक की बारिश करके,
मेरा भी जीवन तारो,
तुम बलशाली हो ग्रन्थ के ज्ञाता,
तुम बिन कोई भी पार ना पाता,
तेरी महिमा गाके हनुमत,
तर गए लाख हजारो,
सादर सेवा की भाव जगी है,
तेरे दरश की आस लगी है,
हम है तुम्हरे भक्त वो हनुमत,
ऐसे ना हमको बिसारो,
भक्त परदेसी के तुम हितकारी,
गावे ‘निरंजन’ महिमा तुम्हारी,
जीवन नैया बिच भंवर में,
आके पार उतारो,
स्वर – निरंजन मिश्रा।
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