
हम कसम राम की खाते है,
मंदिर तो वहीँ बनवाएंगे,
नासमझो को समझाते है,
अब हर हिन्दू को जगाना है,
तन मन और धन से लगाना है,
हम किसी से ना घबराते है,
हम राम शरद की क़ुरबानी,
को भूल कभी ना पायेंगे,
उनकी बातें दोहराते है,
हर हिन्दू का है ये अधिकार,
जो आगे आये ना है धिक्कार,
गैरो की ये जागीर नहीं,
अब हमरे मन में धीर नहीं,
दुश्मन को ये बतलाते है,
हर हिन्दू का है ये सपना,
अधिकार मिले हमको अपना,
ये सोच के हम हर्षाते है,
श्री राम से जिसको प्यार नहीं,
उसे जीने का अधिकार नहीं,
इस ‘श्याम’ की दिल की बताते है,
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