
हम दीवाने महादेव के
ओ तेरी माया ना जाने
हम है तेरे दीवाने
रे बाबा तेरे दीवाने
रे भोले तेरे दीवाने
जो गंगा को सर से है बहाते
उसके दीवाने..
जो नाग को है गले सजाते
जो में मस्ती डमरू है बजाते
जो तांडव भयंकर मचाते
जो राख को तन पर है रमाते
जो विष को भी पि जाते हम
जो कैलाश के राजा कहलाते
जो शमशानों में डेरा लगाते
जो बेल पत्र से खुश हो जाते
जो दिन दुखियो के दुःख को मिटाते
जो मन चाहा वर दे है जाते
जो औघड़ दानी है कहलाते
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