
एक तेरी, साँवरी सूरत से,
बस हो ही गया है, प्यार मुझे
खा करके, ज़माने की ठोकर,
एक तूँ ही मिला, दिलदार मुझे
मेरे इस, उजड़े गुलशन की,
अब तक न मिली है, बहार मुझे
ओ नन्द लाला, अब देर न कर,
झट से दिखला, दीदार मुझे
हो मुरली वाले, यार तेरा,
हो कमली वाले, यार तेरा,
प्यार पाने, आ गए,,,,
हम वृन्दावन
आ गए,
हम वृन्दावन आ गए
तुझ बिन बीती, कितनी रातें
तुझसे करने, को कुछ बातें
मनमोहन, दिलदार तुमको
बिनती सुनाने आ गए,,,,
बिनती तुमसे, ये ही साँवरिया
तेरे दर पे, बीते उमरिया
वृन्दावन की, पावन रज को
मस्तक पे लगाने आ गए,,,,
हम तो हैं तेरे, प्रेम दीवाने
दीवाने, तेरे मस्ताने
सारे जग को, ठुकरा के हम
तुमको रिझाने आ गए
पागल की, पागल ही मस्ती
भूल के बैठे, अपनी हस्ती
चित्र वचित्र भी, वृन्दावन की
महिमा गाने आ गए,,,,
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