
हमारे दो ही रिश्तेदार एक हमारे बांके बिहारी दूजे लखदातार
हमारे दो ही रिश्तेदार,
एक हमारे बांके बिहारी,
दूजे लखदातार,
एक बजावे मधुर मुरलिया,
एक कहावे सेठ सांवरिया,
एक है राजा वृंदावन के,
एक खाटु के सरदार,
देख बना के रिश्तेदारी,
कट जाए तेरी विपदा सारी,
एक भरे भंडार सभी के,
एक करे भव पार,
एक है श्री हरिदास दुलारे,
दूजे है हारे के सहारे,
एक चरावे वन वन गैया,
एक लीले असवार,
मान ‘रविंदर गुरूजी’ का कहना,
जो तुमको सुख से है रहना,
कुञ्ज बिहारी रटते रहिये,
ओ पागल के यार,
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