
हारे का सहारा श्याम धनि
क्यों दर दर ठोकर खाता है क्यों श्याम शरण नहीं जाता है,
क्यों जीवन व्यर्थ गवाता है क्या तुम को नहीं पता,
हारे का सहारा श्याम धनि ,
भक्तो का प्यारा श्याम धनि,
जय हो..
जो तू श्याम शरण में जाएगा मेरा वादा है खाली नहीं आएगा,
जब देता है देता है चपड़ फाड़ सांवरे,
खाटू नगरी में बैठा झंडा गाड़ सांवरे ,
जब श्याम लगन लग जाएगी सोइ किस्मत तेरी जग जाएगी,
तू बाबा की मस्ती में होजा चूर वनवारे ,
श्याम बाबा नहीं होगा तुमसे दूर वनवारे,
बाबा देव बड़ा बलबनी है बाबा श्याम शीश का दानी है,
पापु शर्मा का चरणों में उजारा हो गया,
श्याम बाबा खाटू का हमारा हो गया,
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