
हारे के सहारे श्याम, मुझे गले लगा लो ना भक्ति
हारे के सहारे श्याम,
मुझे गले लगा लो ना,
मैं हार के आया दरबार,
मुझको भी सम्भालो ना।।
मेरे श्याम तेरा डंका,
सारे जग में बजता है,
(तेरे दर पर आती है,
दुनिया दीवानी,
भरे सबकी झोली,
ये शीश का दानी,
मुझे भी प्रभु,
एक पल तो निहारो,
मेरे सुने जीवन को,
तुम ही सवारो)
कहते है आंसू से,
मेरा श्याम पिघलता है,
हालात तो देख मेरी,
जरा मुझे बचा लो ना,
गर आंख में आंसू है,
तो किसको दिखाऊ मैं,
(इन अश्को की धारा को,
तुम ही सम्भालो,
आकर कन्हैया,
तुम मुझको बचा लो,
नही आओगे तुम जो,
बन कर खिवैया,
मैं मर जाऊंगा,
तेरे दर पर कन्हैया)
अब छोड़ तेरे दर को,
बता किस दर जाऊ मैं,
क्या नहीं संभालोगे,
इतना तो बता दो ना,
हारे के सहारे हो,
तो क्यों नहीं आते हो,
(मुझे तुझसे चाहत है,
इतनी मुरारी,
तेरे ही भरोसे पे,
दुनिया हमारी,
जो ना आये तो हम,
ये समझेगे प्यारे,
बस नाम के हो,
हारे के सहारे)
क्या तुम भी श्याम प्रभु,
झूठा नाम कमाते हो,
इस नाम का ही बाबा,
वो फर्ज निभाओ ना,
मैंने सुना था कि दर पर,
सब एक बराबर है,
(कितनो को तारा है,
तुमने मुरारी,
पर तेरे भगत थे,
वो तेरे पुजारी,
बराबर तो तब है,
जब हमको भी तारो,
वरना तू करता है,
सौदा बिहारी)
पर लगता है मुझको,
दीनो का अनादर है,
‘भानु’ को हराकर ये,
बदनामी पाओ ना,
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