
हे गिरधारी कृष्ण मुरारी नैया करदो पार
हे गिरधारी कृष्ण मुरारी नैया करदो पार खिवईयां बन जाओ,
बन जाओ जी बन जाओ आज खिवईयां बन जाओ,
संकट हारी अर्ज गुजारी नीले का असवार खिवईया बन जाओ,
कइया रूसा बेठ्या हो बोली जी कुछ बोलो जी,
रीस करो क्यों टाबरा पे अखियां तो प्रभु खोलो जी,
झुर झुर रोवे मन को पंक्षी हिवड़े का आधार खिवईयां बन जाओ,
ना रूसिया न पार पड़े तासु प्रीत पुरानी है,
मूलवाया सरसी सांवरियां विठुराई क्यों ठानी है,
दीना नाथ अनाथ पुकारे दुखियाँ थारे द्वार खिवईयां बन जाओ,
कुञ्ज बिहारी बनवारी मंडो माहरो पांचो है,
रूप तिहारो कानुड़ा नैना माहि राचो है,
भोला भालो क्यों तो बोलो बोलो लखदातार,
खिवईया बन जाओ,
श्याम बहादुर सेवक सेवा कियो चाकर है सिरधारा को,
जन्म जन्म को साथी हो केवट यो मझधारा को,
कृष्ण कन्हियान डगमग नैया कीजियो पार उतार,खिवईया बन जाओ,
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