
हे डमरूधर शिव नटराजन, हम भी तुमको दिल दे बैठे,
हे डमरूधर शिव नटराजन,
हम भी तुमको दिल दे बैठे,
इक दिल ही तो बस प्रभु था अपना,
यह दिल भी तुम्हारा कर बैठे,
दिल कहता है तुम दानी हो,
पर मन कहता कैसे मानूँ,
कभी आओ हमें दरसन देने,
फिर हम भी कहें मेरे हो बैठे,
शिव सत्य तुम्ही भगवंत तुम्ही,
ब्रह्म अनादि अनंत तुम्ही,
मन भूल से भी न गुणगान करे,
तुम हो कि मुझे अपना बैठे,
हे रामचरन अनुरागी शिव,
हे अबिनासी बैरागी शिव,
अब ऊर धरी नित तुमको ध्याऊँ,
अज्ञान हमारा सब हर बैठे,
आभार: ज्योति नारायण पाठक
वाराणसी
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