
हे श्याम मुझे अपना ले
हे श्याम मुझे अपना ले दुनिया से डर लगता है
दुनिया यह दो बूंद नहीं बस तू ही सागर लगता है॥
जब से आया इस दुनिया में लगे न कोई अपना
एक तुम ही हो मेरे गिरधर लगे जगत यह सपना,
ये दुनिया विरानी बस्ती तू अपना घर लगता है॥
करुणा के सागर तुम हो , भक्तों के तुम भयहारी
सुखकर्ता हो दुखहर्ता हो सबके तुम हितकारी,
तेरा पावन प्रेम जगत में मर के अमर लगता है॥
छल ही छल है इस दुनिया में एक तुम ही तो निश्छल हो
भक्तों की प्यास बुझाते एक तुम ही अमृत जल हो,
उद्धार करो मेरे प्रभु जी यह तन मन तुझ में लगता है॥
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