
चार दिना की चाँदनी है फिर अंधेरी रात
हे सुख में हे सुख में
हे सुख में राम रटले हनुमान रटले ।।
या टन माटी की सी गुड़िया पल का ना अएतबार
बाबा का दरबार लगले आए मंगलवार
ओ भक्ता दूर हटले हनुमान रटले।।
चार डिना की चाँदनी है फिर अंधेरी रात
यो टन चरखे के सा चलता
कटे सास की पूनी
थोड़ी से तेरी कटनी रह गयी
कितते जाली दूरी
भजन पे भजन पे भजन पे
भजन पे ठीक डतले हनुमान रटले।।
जो टन डीवे के सा जलता
स्वास तेल सा गलगे
धर्मा कामना सीखले बेब भक्ता
सत्संग कीर्तन छलके
नही ते नही ते तेल घटले हनुमान रत्ले
नही ते तेल घटले हनुमान रत्ले
हे सुख में राम रत्ले हनुमान रत्ले
यो तन पानी के सा बुलबुला बाद चलते फुट
और काम ते छ्चोड़ सके पेर
हरी भजन ना छ्छूओते
भरम का बदल छटे हनुमान रटले
हे सुख में राम रत्ले हनुमान रटले।।
यो टन फूल कमाल सा खिल रहा
धूप चड़े मुरझावे
चोखी भक्ति करले बहना
काम तेरे यो आआवे
फिर तेरा फिर तेरा पूरा पतले हनुमान रटले
फिर तेरा पूरा पतले हनुमान रटले।।
अंजनी के दुलारे आज भारत मां ये पुकारे आज
सोटा मार बाला जी सारे भूत और प्रेत भगावे
एक दिन बोले यू रघुराय हनुमान भजन
बालाजी मेरा प्यारे कदे तो दर्शन देखा करे
माँ अंजनी के लाल थोड़ा ध्यान दीजिये
गंगा यमुना सरस्वती की पावन नगरी बांधवा वाले बड़े हनुमान बनते
अंजनी को लाल निरालो रे अंजनी को लाल
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