
अधम उधारण जीवो ने तारन,
गंगा माँ नवावे रे,
जनम मरण रा पाप धोयने,
भवसागर सु तिरावे रे,
अरेे जनम मरण रा पाप धोयने,
साठ हजार सुत राजा सगर रा,
हर की पोढी हरिद्वार में,
दर्शन माँ दरसाया रे,
जो कोई नहावे गंगा घाट पे ओ,
जो कोई नहावे गंगा घाट पे,
अंत शुद्ध हो जावे रे,
कुम्भ कलश री काची काया,
नारायण बनावे रे,
सात पेरी री डांगडी मे,
हरी हंसो बसावे रे,
पंख नाल सु हंसो निकले ओ,
पंख नाल सु हंसो निकले,
आ काया कुलमावे रे,
क्रिया करने गंगा घाट पर,
पंडा फूल हरावे रे,
मिनक जून रो लेखो करने,
सात पेरी री सूखे बास मे ओ,
सात पेरी री सूखे बास मे,
हंसा ने बैठावे रे,
कुम्भ कलश ने गंगाजल ले,
डांगडी भर लावे रे,
पंथ बोर ने पाठ पुराये,
डांगडी पथरावे रे,
सात पोर री सतसंग करने ओ,
सात पोर री सतसंग करने,
रातडली जगावे रे,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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